God is Kabir


                                  वैलेंटाइन डे 
           
               
  
वैलेंटाइन डे 
प्यार जिसके बिना जिंदगी चलना संभव नही है । जिस प्रकार मछली जल के बिना अधूरी है उसी प्रकार जीवन प्यार के बिना अधूरा है ।
प्यार उमंग है ,रोशनी है जो जीवन मे नई कल्पनाओं के साथ जीने की राह दिखाता है । प्यार के लिए लिए सभी के अपने-अपने नजरिया है और उसके अनुसार परिभाषा गढ़ते है ।
प्यार को हासिल करना नही बल्कि प्यार को महसूस करना जरूरी है । तभी तो प्रेम के ढाई अक्षर पर बड़े-बड़े ग्रँथ रच गए है ।
सच्चा प्रेमी वही होता है जो प्यार के लिए मरने - मिटने की कसम नही बल्कि प्यार को महसूस कर समझ कर सही निर्णय लेता है ।

 प्यार गुनाह नही है 
 प्यार गुनाह नही है लेकिन स्वार्थी बनना ठीक नही है । लेकिन प्यार जैसे अमृत में अपराध का कड़वा घूंट क्यों मिल जाता है ?
प्यार में अंधे होकर मर-मिटना या प्यार को जबरदस्ती हासिल करना प्यार नही बल्कि पागलपन की पहचान है जो कुछ भी कर गुजरने को तैयार होता है ।
जिसके वर्तमान में कई उदाहरण देखे जा रहे है जैसे नशा करना , घर से भाग जाना , गुपचुप शादी करना ,प्रेमिका की हत्या करना और सारी जिंदगी जेल में चक्की पिसना या कॅरियर खत्म कर लेना आदि जो आज पुलिस थानों और अदालतों में हाजरी में पुकारे जाते है ।
आखिर प्यार जैसे अमृत को अपराधों की जेल में डाल दिया है क्यो ..?

प्यार के साथ जिम्मेदारी  
सब जानते है कि प्यार पर कई ग्रँथ रचे गए है जैसे सोहनी-महिवाल , हीरा-रांझा , सलीम-अनारकली , रोमियों-जूलियट या लैला-मजनूं जिनकी तरह आज भी जीवन भर साथ रहने की या मर - मिटने की कसमें खाई जाती है ।
लेकिन इन सब कसमों को पूरा करने के चक्कर मे क्या कभी किसी ने मोहब्बत करने वालों के खामोशी से पिसते परिवार वालों के बारे में सोचा ? 
क्या इनके मां-बाप ने इनसे प्यार नही किया था या इनकी कोई ख्वाहिश नही थी , क्या इनकी खुशियों के या इनके प्यार का कोई मायने नही है जो आज किसी को याद नही है ..
आखिर क्यों ?
सबको उनकी प्रेम कहानी याद है लेकिन उस प्रेम कहानी में किसी ने मां-बाप , भाई-बहन के दर्द की कल्पना की है !
आज भी अपने स्वार्थ को पूरा करके अपने माँ-बाप को शर्मसार करते है और वह दुःखी मां-बाप सारा जीवन अपनी परवरिश को कोसते  रह जाते है 😥 
इसलिए प्यार के साथ - साथ अपनी परिवार की खुशियों के बारे में सोचे अपनी जिम्मेदारी भी समझें ।

प्यार की सही परिभाषा  
वैलेंटाइन डे रोमन इतिहास का काला दिन जिस दिन एक संत वैलेंटाइन को फांसी पर लटका दिया था आखिर यह प्यार का दिन कैसे हो सकता है ।
काले दिन को प्यार की खुशियों का नाम कैसे दिया जा सकता है ?
प्यार की किसी दिन की जरूरत नही बल्कि प्यार तो आनंद है जो केवल सत भक्ति से ही मिलता है ।

वैलेंटाइन तो केवल पूर्ण परमात्मा होता है जो प्यार की सही परिभाषा बताता है ।
वह पूर्ण परमात्मा कौन है ? यह केवल संत रामपाल जी महाराज की शरण ने जाने से ही पता चलेगा ।
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Comments

  1. Kabir is complete god
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    Ishvar tv at 8:30pm

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